कांग्रेस सरकार का किसान विरोधी चेहरा आया फिर सामने, तभी तो उसके विरुद्ध किसान सड़कों पर: अश्वनी शर्मा

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पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों के गन्ने का बकाया अभी तक ना जारी किए जाने के विरोध में किसानों द्वारा जालंधर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रेल मार्ग जाम किए जाने का भारतीय जनता पार्टी पंजाब ने समर्थन किया है।

भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने पंजाब की कांग्रेस सरकार पर गन्ने की कीमतों में भारी कमी, गन्ना उत्पादकों का बकाया अदा ना करने पर कड़ा विरोध जताते हुए कहाकि यह कांग्रेस सरकार की किसानों के प्रति उनकी मानसिक का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहाकि कांग्रेस की किसान विरोधी नीतियों के कारण ही किसानों द्वारा जालंधर-दिल्ली राष्ट्रीय राज-मार्ग तथा रेल-मार्ग पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब फसल के लिए 310 रुपये प्रति क्विंटल दे रहा था, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में 383 रुपये दिया जा रहा था। उन्होंने गन्ने की कीमत कम से कम 400 रूपये प्रति क्विंटल किए जाने की माँग की।

अश्वनी शर्मा ने कहा कि गन्ने की कम कीमतों के कारण पंजाब में किसानों की अति दयनीय स्थिति है। केंद्र सरकार हर साल कीमतों में वृद्धि कर रही है, पंजाब की कांग्रेस सरकार ने 2017 से कीमतों में वृद्धि नहीं की है। इसके अलावा, किसानों का 200 करोड़ रुपया बकाया है। किसानों की हिमायती होने का ढोंग करने वाली कांग्रेस सरकार द्वारा उन्हें बर्बाद किया जा रहा है। उनके पास अब अपने हितों की रक्षा करने के लिए धरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के कारण 1.8 लाख से अधिक किसान सड़कों पर हैं।

अश्वनी शर्मा ने कहा कि पिछले इतने सालों से कीमतें नहीं बढ़ा कर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह निजी मिलों को फायदा पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहाकि मूल्य ना बढ़ाना निजी मिल मालिकों के साथ कांग्रेस सरकार की स्पष्ट रूप से भागीदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार किसानों का 200 करोड़ से अधिक बकाया राशि अदा करने में विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्य और केंद्र अधिक कीमतों की पेशकश कर रहे हैं, पंजाब सरकार मूल्य वृद्धि के लिए किसानों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। अगर हरियाणा सरकार किसानों का सारा बकाया चुका सकती है तो पंजाब की सरकार क्यों नहीं?

अश्वनी शर्मा ने कहा कि राज्य में 16 चीनी मिलें हैं जिनमें से सात सरकारी क्षेत्र में हैं, जबकि शेष नौ निजी हैं। जबकि गन्ने की खेती का रकबा 2017 में 96000 एकड़ से बढ़कर 2021 में 200000 एकड़ हो गया है, सरकार के पास स्थिति से निपटने के लिए अब तक कोई योजना नहीं है। निजी और सरकारी दोनों मिलों पर गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है।
अश्वनी शर्मा ने कहाकि पंजाब सरकार के पास कोई शोध केंद्र नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर वे समस्याओं के समाधान के लिए हरियाणा में स्थित करनाल शोध केंद्र को देखते हैं। इसके अलावा गन्ने की कोई नई किस्म विकसित नहीं की जा रही है, मिलों की पेराई क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है, मिलें पुरानी हैं और कर्मचारियों की कमी है। सहकारी विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और बिक्री से कम वसूली है। उन्होंने कहाकि भारतीय जनता पार्टी पंजाब के किसान भाईयों के साथ खड़ी है और उनकी हर सम्भव मदद को तैयार है।