कैप्टन के 6 माह में 237 किसानों ने की आत्महत्या, पंजाब भाजपा अपने आंकड़ों पर अडिग

पंजाब सरकार चाहते तो नाम, पता सहित सूची सौंप सकती है भाजपा 
6 महीने में 237 किसानों की आत्हत्या की सूची नाम, पता सहित सरकार चाहे तो भाजपा दे सकती है: सांपला
भारतीय जनता पार्टी पंजाब इकाई आज भी अपने बयान पर अडिग है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार के 6 महीने के शासनकाल में 237 किसान आत्महत्या कर चुके हैं और मुख्यमंत्री चाहते हैं तो हम आत्महत्या कर चुके किसानों की सूची नाम व पता सहित पंजाब सरकार को सौंपने को तैयार हैं। यह कहना है भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेशाध्यक्ष विजय सांपला का जो कैप्टन अमरिंदर के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया रख रहे थे, जिसमें कैप्टन ने विपक्षीय पाॢटयों पर किसानों के मुद्दे पर झूठ व मनघडंत कुप्रचार का आरोप लगाया है।
‘कैप्टन साहब पूर्ण कर्जा माफी का चुनावी वायदा किया आपने, गुटका साहिब हाथ में पकड़ कसम खाई आपने, किसानों से कर्जा माफी के लिए फार्म भरवाए आपने, ‘कर्जा-कुर्की खत्म, फसल की पूरी रकम’ नारा दिया आपने, पहली कैबिनेट मीङ्क्षटग और पहले माह में सभी वायदे पूरे करने की बात कही आपने और 6 महीने बीत जाने पर जब हम आपको आपके चुनावी वायदे याद करवाते हैं तो आप उसे राजनीति करार देते हैं’, कहते हुए सांपला ने कटाक्ष किया।
सांपला ने कैप्टन से कहा कि हमारी गलत बयानी किसानों को निराश कर आत्महत्या की ओर नहीं धकेल रही, बल्कि आपकी वायदाखिलाफी से निराश होकर किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इस बात की पुष्टि तब हो गई, जब तहसील अजनाला के गांव तेड़ाकलां के किसान मेजर सिंह ने अपने सुसाइड नोट में कांग्रेस सरकार की वायदाखिलाफी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इतना ही नहीं जिस दिन आपने विधानसभा में पूर्ण कर्जा माफी से मुकरते हुए सिर्फ 2 लाख रुपए की कर्जा माफी की बात कही तो आपकी बात सुनकर गुरदासपुर जिले अधीन पड़ते गांव बालापिंड के रहने वाले 47 वर्षीय इंद्रजीत सिंह ने आत्महत्या कर ली।
सांपला ने कैप्टन की नीयत पर प्रश्र उठाते हुए कहा कि वित्तीय स्थिति खराब होने के कारण कैप्टन पूर्ण कर्ज माफी नहीं कर पा रहे हैं, पर यह समझ नहीं आ रहा कि जिन चुनावी वायदों में ज्यादा वित्तीय भार नहीं पड़ता, वह क्यों नहीं पूरे किए जा रहे। जैसे कि प्राकृति आपदा का मुआवजा 20 हजार रुपए प्रति एकड़, आत्महत्या करने वाले किसान के परिवार को 10 लाख मुआवजा तथा उस घर में एक नौकरी देने, सबसिडी किसानों के खातों में डालना, प्राइसिस स्टेबेलाइस फंड बनाना तथा हर किसान को पांच लाख तक लाइफ व हेल्थ इंश्योरेंस देने के अपने वायदे को भी पूरा नहीं किया। शायद सरकार की नीयत खराब है इसलिए किसानों से किए वायदे पूरे नहीं हो रहे। बदनीयत तो इससे भी झलकती है कि कैप्टन सरकार पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर पंचों-सरपंचों को बर्खास्त करने का अधिकार डायरेक्टर पंचायत अफसर से लेकर जिले के डी.सी. को सौंपने जा रही हैं, इससे किसान की अपने गांव की अपनी चुनी हुई पंचायत जिला अधिकारियों के रहमो-कर्मों पर निर्भर हो जाएगी और किसान बुरी तरह से टूट जाएगा। सांपला ने कहा कि आज जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उसके लिए और कोई नहीं पंजाब की कांग्रेस सरकार ही जिम्मेदार है और अगर पंजाब सरकार तुरंत न जागी तो पंजाब किसानों का शमशान बन जाएगा।