सेखड़ी तथा रंधावा के परिवारों ने हिलाई जाखड़ की जड़े बाजवा की खामोशी भी करेगी कांग्रेस की जड़ों को खोखला

अपना पंजाब पार्टी के फैसले ने भी डाला कांग्रेस को संशय में
एक के बाद एक राजनीतिक पार्टी का नेता दे रहा है गठबंधन को हिमायत
लोकसभा हलका गुरदासपुर से कांग्रेसी प्रत्याशी सुनील जाखड़ को जहां भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है, वहीं इस लोकसभा हलके से कांग्रेसी टिकट के प्रमुख दावेदार व बटाला के पूर्व कांग्रेसी विधायक अश्वनी सेखड़ी के परिवार द्वारा कांग्रेस के खिलाफ झंडा उठाकर सुनील जाखड़ चुनावी मुहिम को तकड़ा झटका दिया है। इतना ही नहीं इससे पहले हलका बाबा बकाला से कांग्रेसी विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा के भाई ने भी कांग्रेसी प्रत्याशी के खिलाफ खड़े होकर उस हलके से कांग्रेस प्रत्याशी की जड़े हिला दी। दिलचस्प बात यह है कि रंधावा परिवार के बाद अब सेखड़ी परिवार ने भी न केवल जाखड़ को पैराशूट से उतरा हुआ बाहरी प्रत्याशी बताया, वहीं यह भी कहा कि पार्टी के इस फैसले से खफा सैंकड़ों वरिष्ठ कांग्रेसी परिवार भी जाखड़ का विरोध करते हुए उनके खिलाफ मतदान करेंगे।
यहां यह बात भी वर्णनीय है कि राज्यसभा सदस्य व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा की खामोशी भी जाखड़ के  चुनाव अभियान की जड़ों में तेल देती दिखाई दे रही है। आज शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल शामिल होने की घोषणा करते हुए सेखड़ी के भाई इंद्रसेखड़ी ने कहा कि उनके परिवार ने कांग्रेस के लिए बीते लंबे समय से बड़ी संजीदगी के साथ काम किया, पर जब अब टिकट की दावेदारी की बात आई तो पार्टी ने इस हलके के समॢपत परिवार को अनदेखा करके एक ऐसे व्य1ित को टिकट दे दी जो न केवल अपने गृह लोकसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव हार चुके है बल्कि छह माह पूर्व हुए विधान सभा चुनाव मे मतदाताओं द्वारा बुरी तरह नकारे जा चुके है।
वर्णनीय है कि अकाली भाजपा प्रत्याशी स्वर्ण सलारिया को सेखड़ी परिवार के अलावा अपना पंजाब पार्टी ने भी खुले समर्थन का ऐलान किया है। सुच्चा सिंह छोटेपुर की अगुवाई वाली अपना पंजाब पार्टी का गुरदासपुर लोकसभा हलके के अंदर अच्छा बोलबाला है। जिससे सलारिया का पक्ष काफी मजबूत हुआ दिखाई दे रहा है।
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश में सत्ता पर काबज कांग्रेस पार्टी के खिलाफ बड़े छोटे से समय के बाद ही दूसरी राजनीतिक पाॢटयों ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अपना पंजाब पार्टी तथा सेखड़ी परिवार के फैसले से पहले हलका दीनानगर से आम आदम पार्टी की चुनाव लड़ चुके जोगिन्छ्र सिंह छीना ने भी अपने सैंकड़ों साथियों सहित अकाली-भाजपा गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया था। इसी तरह ही फतेहगढ़ चूडिय़ा से बहुजन समाज पार्टी की पर चुनाव लड़ चुके कुलवंत सिंह सहित वहां के मार्कीट कमेटी चेयरमैन बलदेव सिंह तथा बलाक समिति चेयरमैन हरमेल सिंह ने भी अपनी-अपनी पाॢटयां छोडक़र अकाली-भाजपा गठबंधन की हिमायत पर उतरने का ऐलान कर दिया है।
राजनीतिक माहिरों का मानना है कि आम तौर पर होता यह है कि सत्ता पक्ष के कार्यकाल के अंतिम पड़ाव में लोगों तथा विशेषकर राजनीतिक लोगों के मनों में सत्ता पक्ष की विरोधता पैदा होती है, पर पंजाब में इस सब कुछ से विपरित ही घटित रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि किसी राजनीतिक पार्टी को सत्ता संभालने के 6 माह बाद ही लोगों के रोष का सामना करना पड़ रहा हो। उन्होंने कहा कि सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा निकाले आज के रोड शो में भी कोई भव्य जनसमूह शामिल न होना भी इस बात की गवाही भरता है कि कांग्रेस सरकार ने लोगों के मनों में से अपना वजूद गवा लिया है।
वोट पडऩे में बेशक अभी दो दिन बाकी हैं, पर जिस तरीके के साथ हलके में अकाली-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में एक बड़ी लॉबी जुडऩी शुरू हुई है, इसने विरोधी गुट की एक बार नींद खराब की हुई है। हालांकि असली स्थिति का खुलासा 15 अकतूबर को होगा, पर जिस तेजी से यहां राजनीतिक तबदीलियां देखने को मिल रही हैं, उससे लगता है कि भाजपा तथा अकाली दल गठबंधन यहां अपनी जीत का इतिहास रचेगा।